Saturday, October 24, 2009

सैफ़रन आर्ट की वेबसाईट में शामिल होने वाले सबसे कम उम्र के चित्रकार अर्पित बिलोरिया के चित्रों की सहजता में गहरे भाव - बोध का आभास होता है

अहमदाबाद के अर्पित बिलोरिया के काम को व्यापक जाँच परख से गुजरने के बाद अंततः सैफ़रन आर्ट की सूची में शामिल होने की स्वीकृति मिल गई है | सैफ़रन आर्ट की वेबसाईट पर आने के कारण अर्पित बिलोरिया का काम अब अंतर्राष्ट्रीय कला प्रेक्षकों तथा कला प्रेमियों के लिए भी देख पाना संभव हो सकेगा | भारतीय कला में दिलचस्पी रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय कला प्रेक्षकों व कला प्रेमियों के बीच सैफ़रन आर्ट की अच्छी पहचान व प्रतिष्ठा है | सैफ़रन आर्ट ने पिछले करीब एक दशक की अपनी सक्रियता में भारतीय कलाकारों के काम को अंतर्राष्ट्रीय कला जगत में परिचित कराने, उन्हें प्रतिष्ठा दिलाने तथा उन्हें बिकवाने का उल्लेखनीय योगदान दिया है | दरअसल, इसी योगदान के कारण सैफ़रन आर्ट को भारतीय पहचान की एक ग्लोबल आर्ट कंपनी के रूप में देखा/पहचाना जाता है | यही वजह है कि सैफ़रन आर्ट की कलाकारों की सूची में शामिल होने का हर भारतीय कलाकार सपना देखता / रखता है | इसी सपने को देखते/रखते हुए अर्पित बिलोरिया ने करीब एक वर्ष पहले सैफ़रन आर्ट की कलाकारों की सूची में शामिल होने के लिए आवेदन किया था | सैफ़रन आर्ट की फैसला करने वाली टीम के लोगों ने पिछले एक वर्ष में तीन-चार बार अर्पित से बात की और न सिर्फ उनके नए पुराने काम को सिलसिलेवार तरीके से देखा - परखा, बल्कि उनसे बात करके कला को लेकर तथा काम करने के उनके तरीके को लेकर उनके विचारों को भी जाना - समझा; और व्यापक जाँच - परख के बाद एक  कलाकार के रूप में उन्हें कलाकारों की अपनी सूची में शामिल करने के योग्य पाया |

सैफ़रन आर्ट ने हाल - फ़िलहाल के वर्षों में जिन कलाकारों को चुना है, उनमें अर्पित बिलोरिया अहमदाबाद के अकेले कलाकार हैं | इस आधार पर कहा जा सकता है कि अर्पित बिलोरिया के जरिये अहमदाबाद ने बहुत समय बाद सैफ़रन आर्ट में जगह प्राप्त की है | सैफ़रन आर्ट में कलाकारों की सूची को देखने पर हम यह भी पाते हैं कि वहाँ अर्पित बिलोरिया सबसे कम उम्र के चित्रकार हैं | यह तथ्य युवा चित्रकारों में अर्पित बिलोरिया की एक अलग पहचान का सुबूत भी देता है और उसे रेखांकित भी करता है | 1980 में जन्में अर्पित ने अहमदाबाद के सी एन कॉलिज ऑफ फाइन आर्ट्स से कला की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की है | अर्पित एक अत्यंत सक्रिय और प्रयोगशील कलाकार हैं | उनकी सक्रियता और प्रयोगशीलता का ही सुबूत है कि पिछले तीन - चार वर्षों में उन्होंने अहमदाबाद और बड़ौदा के साथ - साथ दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, पटना, जयपुर, वाराणसी, उदयपुर, भोपाल, कालीकट जैसे देश के प्रमुख कला केन्द्रों में अपने काम को प्रदर्शित तो किया ही है; अपनी सक्रियता को विविधता भी दी है | अर्पित ने अपनी कला यात्रा स्कल्पटर के रूप में शुरू की थी, लेकिन फिर जल्दी ही वह पेंटर हो गए | उन्होंने इंस्टालेशन भी किया | इसी वर्ष मई - जून में थाने कला भवन में उन्होंने शाम पहपालकर व देविबा वाला के साथ मिलकर थर्मोकोल, नायलोन स्ट्रिंग्स तथा प्रोजेक्टर्स जैसी चीजों से जो एक इंस्टालेशन तैयार किया था, उसकी कला जगत में खासी धूम रही थी | देविबा वाला के साथ उन्होंने अहमदाबाद में वर्वे नाम के एक कला - ग्रुप की स्थापना की है|
अर्पित ने अपने चित्रों में काले रंग का प्रयोग तमस तत्त्व के रूप में किया है | अपने केनवस उन्होंने बिल्कुल सफ़ेद और खाली छोड़े हैं, लगता है कि जैसे उन्होंने भावनाओं व विचारों की आवाजाही के लिए जगह बनाई है और काले रंग के विभिन्न शेड्स के बहुत थोड़े से / सीमित से उपयोग से उन भावनाओं व विचारों को प्रेरित करने का जैसे 'मौका' दिया है | काले रंग के प्रयोग को इसीलिए हमनें तमस तत्त्व के रूप में देखा / पहचाना है| यही तत्त्व उनके चित्रों को एक दार्शनिक भावभूमि देता है | अर्पित के चित्रों में व्यक्त होने वाली दार्शनिकता विचार - बहुल न होकर अनुभूति - जन्य तथा संवेदनात्मक है; और उनके चित्रों की अनुभूति व संवेदना इतनी गहरी है कि उसे सहजता से समझ पाना कठिन भी होता है | उनके चित्रों में व्यक्त होने वाली अनुभूति व संवेदना 'जो है' और 'जो नहीं है' के बीच आवाजाही - सी करती दिखती है | उनके चित्रों में हालाँकि सहजता दिखाई पड़ती है लेकिन उस सहजता में गहरे भाव - बोध का आभास होता है | सहज और सामान्य से 'दिखने' वाले अर्पित के चित्रों में सूक्ष्मतम संवेदनाओं की वृहद अभिव्यंजना दिखाई पड़ती है |
अर्पित बिलोरिया के कुछेक चित्रों को आप यहाँ भी देख सकते हैं :












































5 comments:

  1. The paintings of arpit are a synthesis of the influence of expressionism and of the belief that thoughts and actions depend on the subconscious activity of the mind. It is an over-powering abstract image; the result of broad black strokes of paint ( ? ) slashed and swung impetuously across a tout white background. The black seems to haunt, to swell, to overwhelm by its directness and impact.

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  2. Artist like arpit biloria can be considered not typical because they are unique - and harbingers of contemporary directions. One of the - not very unique, but more 'vibrant' - preoccupations seems to be the discovery of space. Arpit's work is an arrangement of spaces. Different shades of black gives his hues a luminous effect, and records the devastating loneliness of man's soul.

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  3. Arpit is a completely different figure. He is an intelligent searcher for the hidden lines in landscape and universe. He is the discoverer of the mystic connective tissue that he divines under the visible forms. A modern mystic, who searches for the strange life behind phenomena, for a subcutaneous landscape that he suspects.

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  4. Arpit is one of the most poetic painter. His technique is very simple. His effortless way of capturing images and the delicate work take the onlooker to an unknown destination. After seeing them one feels that the mundane world never existed or shell never exist.

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  5. सुबोध कुमार गुप्ताNovember 1, 2009 at 5:21 AM

    अर्पित का काम देख कर मैं अनुमान लगा सकता हूँ की कला के प्रति उनमें समर्पण का भाव है | कला में इस समर्पण भाव की आज बहुत आवश्यकता है ताकि कला - रचनाएँ अपनी एक अलग पहचान बनाये रखें तथा उनका प्रस्तुतीकरण मौलिक हो | जरूरी है की आप की रचना किसी शार्टकट का परिणाम न हो, न ही उसमें पापुलर तथा व्यवसायिक सफलता का लालच हो |

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